A SHORT STORY

क्या माहिम डूब जाएगा?

गीता और विजय को आज दिन भर घर पर ही ठहरने को कहा गया है।

माँ और बापू पूरी बस्ती के साथ सुबह से ही नाव लेकर समुन्दर में निकले हैं।

पिछले डेढ़ महीने से रेडियो पर खबरें आ रही हैं। माहिम बस्ती का अस्तित्व खतरे में हैं। किसी रिपोर्ट के हवाले से कहा जा रहा है कि दुनिया के कई देशों के समुंदर किनारे के अनेक शहर और गाँव कुछ सालों में डूब जाएंगे।

मछुआरों की पूरी बस्ती खाली कराने का अनाउंसमेंट पिछले सप्ताह से शुरू हो गया है। स्टीमर बोट कई रोज से समुंदर में इधर ही चक्कर लगा रही है। शायद नौसेना के अधिकारी थे उसमें।

कितनी सुकून की जिंदगी चल रही थी। रोजी रोटी, बाजार, स्कूल, तीज- त्योहार, नाच-गाना सब कुछ।

सुना है बांद्रा का किला भी डूब जाएगा।

पिछले साल स्कूल के सारे बच्चों के साथ गीत और विजय बांद्रा किला घूमने गए थे।

इतिहास की टीचर ने बताया कि 16 वीं शताब्दी में पुर्तगाली शासकों द्वारा यह किला बनाया गया था। पहले यहाँ पुर्तगाली जहाजों के आवागमन के लिए बंदरगाह भी हुआ करता था। इस किले से अरब सागर तरफ के क्षेत्र की निगरानी होती थी।

गीता की इतिहास की किताब में चित्र भी है किले का।

‘तो क्या ये सब डूब जाएगा ?’ गीता ने किताब से नजरे हटाते हुए दुखी स्वर में पूछा ।

‘अरे पगली इतनी जल्दी थोड़ी डूबेगा! कई साल लगेंगे’, विजय ने अपना डर छुपाते हुए कहा।

‘समुन्दर का पानी तो घटता बढ़ता रहता है’

लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी है कि जिस तेजी से समुन्दर का जल स्तर बढ़ रहा है, पाँच दस साल में सब डूब जाएगा।

रोकड़े काका ने तो अपना सारा समान पहले ही पनवेल भिजवा दिया है।

बशीर और उसका परिवार तो अपने मामा के यहाँ निजामपुर चले गए हैं। बशीर अब वो वहीं पढ़ेगा।

धीरे धीरे बस्ती खाली हो रही है।

‘मल्ली के दादा दादी तो इतने बूढ़े हैं। उनका तो कोई है भी नहीं। वो कहाँ जाएंगे ?’ गीता ने चिंता से पूछा ।

‘शायद सरकार उनकी कोई व्यवस्था करे’, विजय ने कुछ सोचते हुए कहा।

‘सरकार ये गाँव डूबने से क्यों नहीं बचा सकती ?’ गीता का अगला सवाल था।

‘अरे ये सरकार के हाथ में नहीं है। ये तो कुदरती है। क्लाइमेट चेंज के कारण गर्मी बढ़ रही है। पहाड़ों पर बर्फ की चट्टानें पिघल रही हैं और उनका पानी समुन्दर का जल स्तर बढ़ा रहा है’, विजय ने जानकारों की तरह जवाब दिया।

‘एक हमारा ही गाँव थोड़े ही डूब रहा है। सैकड़ों हजारों गावों पर यही संकट मँडरा रहा है’। विजय ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा

‘पर हमारी रोजी रोटी तो समुन्दर से ही है’ गीता बुदबुदाई।

देर शाम माँ, बापू और बस्ती वाले लौट आए। उनके जाल मछलियों से भरे हैं पर दिल और चेहरे बुझे हुए हैं।

बापू के हाथ में एक कागज है। आज कोस्टल गार्ड की स्टीमर फिर आई थी माहिम। एक सरकारी कागज थमा गया है अधिकारी।

लिखा है छः महीने के भीतर बस्ती खाली करना होगी।

गीता ने आज अपने स्कूल में यह बात बताई। बच्चों के बीच यह दिनभर चर्चा का विषय रहा। टीचर ने आज क्लास में क्लाइमेट चेंज, ग्लोबल वार्मिंग और ग्लेशियर के बारे में बहुत सी बातें बताई।

हालांकि टीचर ने माहिम के डूबने के बारे में कुछ नहीं कहा। उन्होंने ये जरूर कहा कि इस तरह के अध्ययन होते रहते हैं और उनकी रिपोर्ट भी जारी होती रहती हैं। लेकिन ये अध्ययन, आने वाले सौ - दो सौ सालों में होने वाली संभावनाओं के बारे में होते हैं।

टीचर की बात से गीता को थोड़ा सुकून सा मिला है। फिर वह कागज क्या था जो बापू के हाथ में था ? गीता सोचने लगी।

उसने घर लौटकर कागज को पूरा पढ़ा। उसमें किसी सी-लिंक ब्रिज के बनने की योजना के बारे में लिखा था। जिसके लिये आसपास की कई बस्तियों को खाली कराए जाने की बात थी।

अब उसे पूरा माजरा समझ आ रहा था। दरअसल उसने दो खबरों को आपस में जोड़ लिया था।

माहिम के डूबने की बात अभी सौ- दो सौ साल दूर थी। पर सी लिंक ब्रिज का काम अगले साल शुरू होने वाला था। बस्तियां खाली कराकर कहीं और बसाई जाएंगी।

अभी बांद्रा किला भी नहीं डूबेगा। वह हल्के से मुस्कराई। उसने स्कूल बैग से इतिहास की किताब निकाली। किताब का वो पेज अभी भी अधखुला- सा था। बांद्रा किले की फ़ोटो झांक रही थी उसमें से।